ग्रामीणो ने किया आंकलन, क्या पाया?

ग्रामीणो ने किया आंकलन, क्या पाया?

आज़ादी के 70 वर्षो के बाद भी लोगो को पेयजल की व्यवस्था से जूझना पड़ रहा है। शौचालय की सुविधा से लोग आज भी वंचित है। समाज का एक समुदाय (मांझी समुदाय )के पास रहने के लिए एक झोपड़ी तक नहीं है।  अंगनबाड़ी केन्द्रो मे पोषाहार वितरण मे गड़बड़ी एवं नियमित पोषाहार का वितरण लगभग न के बराबर हो रहा है। सरकारी विधालयों मे राइट टू एडुकेशन (आर. टी. ई ) के नियमो को ताख पर रखा जा रहा है।  इन सभी समस्याओ के कारण खड़गपुर के लोगो को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

बिहार दलित विकास समिति के बिरेन्द्र बताया कि यह तस्वीर तब सामने आई जब ग्रामीणों ने नक्शा तैयार करके  कुछ पंचायतों का निरीक्षण किया।  इस महीने के 12 जून से 17 जून तक ग्रामीणों ने इन पंचायतो मे – दरियापुर ,चंदवाली स्थान ,खंडबिहारी ,बैजपुर, मुसदन टोला , रघुनाथपुर , गलीमपुर और मंझगाय मे अपने समस्यायों के बारे मे एक – दूसरे के साथ रू –बरू हुए ।

participatory rural appraisal एक विधि है, जिससे कस्बे के लोग मिलकर अपने गाँव के नक्शा बनाते है। इस नक्शे में वे उपलब्ध सुविधाए अंकित करते है, जैसे कि पंचायत भवन, आंगनबाड़ी , प्राथमिक विद्यालय, चंपाकल, कुआं , सौचालय, इन्दिरा आवास, इतियादी ।

18 जून से 20 जून तक  पाँच पंचयतो  (गोवड्डा ,कौड़िया ,बाहिरा, बढ़ौना ,और दरियापुर) मे लोगो ने पंचायतों का आंकलन किया । इन जगहो पर बात करने के बाद कुछ समस्याएं मुख्य रूप से उभर कर सामने आई है।

वो कुछ इस प्रकार है– लगभग सभी पंचायतों मे लोगो को पीने के पानी का अभाव है। शौचालय की सुविधा ना के बराबर है । रहने के लिए मांझी समुदाय के पास घर नहीं है । सरकार द्वारा संचालित किए गए कल्याणकारी योजनाएं ठीक तरीके से चल नहीं रही है ।

इस आंकलन में 50 से 60 महिला ,पुरुष एवं युवाओ ने अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर इस योजना को सफल बनाने मे अपना बढ़ –चढ़ कर योगदान दिया और साथ ही वो लोग गाँव के समस्याओ के प्रति जागरूक भी हुए ।

बिहार दलित विकास समिति, करीबन तीन दशक से इन इलाको में दलित और पिछड़े  जातियों के बीच काम कर रही है।

 

उज्जवल कुमार सिन्हा

न्यूज़नेट इनटर्न

 

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