दरभंगा के गोसलवर गाँव की बेटियो ने रचा इतिहास

दरभंगा के गोसलवर गाँव की बेटियो ने रचा इतिहास

महोदय ,

आज़ादी के 70 वर्षो के बाद जहां हमलोग आधुनिक होते जा रहे है। वही गोसलवर गाँव मे आज तक कोई पढ़ा  नहीं है, और न ही किसी ने मैट्रिक पास तक नहीं की है। लेकिन इस बार 2018 मे हुए मैट्रिक परीक्षा मे दो बेटियो ने पास करके अपने गाँव से नन मैट्रिक होने का दाग मिटा दिया । उसकी इस कामयाबी से मिथिला गौरवान्वित है।

पूजा और नेहा

बिहार के दरभंगा जिले से करीब चार किलो मीटर की दूरी पर बसे एक अति पिछड़ा गाँव गोसलवर की दो बेटियो ने गरीबी और कठिनाइयो का सामना करते हुए गाँव के लिए एक इतिहास रचा है।

इस गाँव की नेहा कुमारी और पुजा कुमारी इस बार मैट्रिक परीक्षा मे सफल हुई है । इससे गाँव के बाकी बच्चो को पढ़ने के लिए प्ररित किया है।

गाँव मे स्कूल नहीं होने के कारण बच्चियो को काफी संघर्ष का करना पड़ा है । उनको स्कूल जाने के लिए पैदल जाना पड़ता था और कुछ दूर तक टेम्पो का सहारा भी लेना पड़ता था।

उन बच्चियो का पढ़ाई के प्रति जुनून को देखकर उनके गरीब माता – पिता ने इस पर होने वाले सारे खर्च का बीड़ा उठाया । नेहा के पिता कन्हैया सहनी अपनी बेटी के उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि हमारे गाँव कि बेटियाँ ने हमारे नन मैट्रिक होने का दाग मिटा दिया।

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वही पुजा कुमारी के पिता बिंदा सहनी ने कहा कि बेटी को मैट्रिक परीक्षा मे पास होने से गाँव मे स्कूल खुल जाने कि उम्मीद जागी है। दोनों बच्चियो कि कामयाबी पर परिवार और गाँव के लोग गौरवान्वित महसूस कर रहे है।

इस गाँव मे न तो स्कूल है और न ही आगनबाड़ी केंद्र है। दोनों बच्चियां आनंदपुर हाइ स्कूल पढ़ने के लिए जाती थी। इसी दौरान भीड़- भाड़ वाली मुख्य सड़क को भी पार करना पड़ता था। यही कारण है कि माँ – बाप चाहकर भी बच्चो को स्कूल भेजने से कतराते थे।

गाँव वालो की आस है कि किसी भी प्रकार से गाँव मे एक स्कूल आरंभ हो ताकि बाकी बच्चो को भी शिक्षा से जोड़ा जा सके ।

सरकार के तरफ से हर पंचायत मे हाइ स्कूल खोलने कि योजना है। इस दिशा मे अगर जल्द से जल्द काम किया गया तो कितने ऐसे बच्चो का भविष्य बन सकता है। जिनके आस पास स्कूल कि सुविधा नहीं है । सरकार को ऐसा जल्द ही करना होगा , जिससे बच्चो का भविष्य सूरक्षित हो सके और आगे चल के अपने राज्य का नाम रोशन कर सके।

 

उज्जवल कुमार सिन्हा

न्यूज़नेट इनटर्न

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