अनाथ बच्चो के लिए आरक्षण की मांग

अनाथ बच्चो के लिए आरक्षण की मांग

सूप्रीम कोर्ट मे उठाया गया अनाथों के लिए जीवन ,शिक्षा और समानता के मौलिक अधिकार का मुद्दा ।

सूप्रीम कोर्ट मे अनाथ बच्चों के हक की बात उठाई गयी। 5 जुलाई (गुरुवार) को कोर्ट ने अनाथ बच्चो को भी एससी –एसटी और ओबीसी की तरह नौकरियो और शिक्षण संस्थानो मे प्रवेश के लिए आरक्षण दिये जाने की मांग वाली याचिका पर केंद्र और सभी राज्यो को नोटिस जारी की।

स्थानीय खबरों के अनुसार कानून मे स्नातक और पेशे से सलाहकार पौलोमी पावनी शुक्ला ने इस याचिका पर बहस की । इसमे कहा गया कि अनाथ बच्चे सबसे जादा मजबूर ,कमजोर और ज़रूरतमन्द होते है ,लेकिन सरकार का ध्यान उनकी ओर नहीं है।

सरकार माता – पिता के साथ रहने वाले एससी –एसटी, ओबीसी ,अल्पसंख्यक और कई अन्य वर्गो के बच्चो को बहुत योजनाओ के अन्तरगत मदद करती है और लाभ देती है। वैसे ही मदद और लाभ अनाथ और बेसहारा बच्चो को भी मिलना चाहिए।  उन्हे भी उच्च शिक्षा के लिए कर्ज़ ,दसवी और बारहवी के बच्चो को

छात्रवृति आदि की सुविधाएं दी जानी चाहिए। अनाथ बच्चो के स्थिति पर लिखी गयी किताब ‘वीकेस्ट ऑन अर्थ –अफेंस ऑफ इंडिया’ की सह लेखक पावनी का कहना है कि देश के 117 जिलो मे एक भी अनाथालय नहीं है।

पावनी ने याचिका मे अनाथ बच्चो के जीवन ,शिक्षा और समानता के मौलिक अधिकार का मुद्दा उठाया है ।याचिका मे कहा गया है कि देश मे करीब दो करोड़ बच्चे अनाथ है। बच्चो के लिए भारत सरकार की एकीकृत बाल संरक्षण योजना है जिसका लाभ इन सभी दो करोड़ बच्चे को मिलना चाहिए । लेकिन वास्तव मे एक लाख से कम बच्चो को ही प्रति वर्ष योजना का लाभ मिल पाता है।

इस मामले पर न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर . भानुमती की पीठ ने ये नोटिस पौलोमी पावनी शुक्ला की याचिका पर सुनवाई की है।

 

 

उज्जवल कुमार सिन्हा

न्यूज़नेट इनटर्न

 

 

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