जलमार्ग के लिए नदियो का बेहतर होना जरूरी

जलमार्ग के लिए नदियो का बेहतर होना जरूरी

बिहार : पटना के गांधी संग्रहालय मे बिहार के राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग पर आज चर्चा किया गया। इस चर्चा के मुख्यवक्ता श्रीपाद धर्माधिकारी थे, जो सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरण शोधकर्ता है। श्रीपाद धर्माधिकारी पुस्तिका,”राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग के विवरण” के लेखक भी है।

बिहार मे कई सारी नदियां है। राष्ट्रीय जलमार्ग के अधिनियम, 2016 मे पारित होने से बिहार की सात नदियो को जलमार्ग घोषित कर दिया गया। इनमे गंगा, गंडक, धाधरा, और कर्मनाशा के प्रस्तावित जलमार्ग शामिल है। बाकी नदियो के प्रस्तावित जलमार्ग – जैसे कि जो जल मार्ग कोसी, सोन, और पुनपुन पर विकसित किये जाएगे।

राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्गो के कुछ फायदे यह भी है –

-रेल और सड़क यातायात के मुक़ाबले जल यातायात से ईंधन कम खर्च होगा। इससे पर्यावरण को कम नुकसान

श्रीपाद धर्माधिकारी

होगा।

-जल यातायात से भारी मात्रा मे सामान को ढोने का काम हो सकता है।

राष्ट्रीय अंतर्देशीय जलमार्ग स्थिति रिपोर्ट नामक ”मंथन” की एक रिपोर्ट मे ऐसे कई सामाजिक और पर्यावरणीय प्रभावों का मूल्यांकन किया गया है।

गाद की समस्या –नदियो मे भारी मात्रा मे गाद के चलते इनकी धाराओ का मार्ग बदलता रहा है और लंबे समय पर देखे तो पूरी नदी के प्रवाह का रास्ता भी बदला है। ऐसा होना जलमार्ग के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगी क्योकि नौ – संचालन मार्ग बदलता रहेगा। इसकी वजह से चैनल को विकसित करना पड़ेगा। ऐसा भी हो सकता है कि जलमार्ग के लिए बनायी गई बाकी सुविधाएं जैसे टर्मिनल्स इत्यादि चैनल के बदलने के बाद किसी काम की ही न रहे, इसलिए जलमार्ग के लिए नदियो का बेहतर होना जरूरी है।

जलमार्गो को नेपाल तक बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। अप्रैल 2018 मे भारत और नेपाल के प्रधानमंत्रियो की भेट के बाद एक अंतर्देशीय जलमार्गो द्वारा नयी संयोजकता पर भारत – नेपाल का बयान जारी किया गया। जिससे नेपाल को समुन्द्र से जोड़ा जा सके।

 

उज्जवल कुमार सिन्हा

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