हमारे लालच के कारण ही हो रही ऐसी बारिश

हमारे लालच के कारण ही हो रही ऐसी बारिश

बारिश एक ऐसा मौसम है जो सबको पसंद है। अगर आपको ऐसा लग रहा है कि अब बारिश के पानी मे वो पहले वाली बात नही रही, तो शायद आप सही है। खासकर पिछले एक दशक मे जीवनदायिनी बारिश जानलेवा प्रदूषण के कारण लगातार एसिडिक होती जा रही है। ऐसे मे बरसात के पानी मे भीगने का मज़ा लेना आप के लिए मुसीबत का कारण भी बन सकता है।

भारतीय मौसम विभाग और इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रोपिकल मेटरोलॉजी के अध्ययन से यह पता चला है कि बारिश के पानी कि गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। कुछ जगहो पर जैसे- नागपुर, इलाहाबाद, विशाखापत्तनम, असम के मोहनबाड़ी मे और तमिलनाडु के कोडाइकनाल से बारिश के पानी के नमूनो की जांच के बाद शोधकर्त्ता ने इस पानी का पीएच वैल्यू 4.77 से 5.32 के बीच बताया है। आपके जानकारी के लिए बता दे कि 5.65 से कम पीएच वैल्यू वाले बारिश के पानी को एसिडिक यानी आम्लीय माना जाता है।

ऐसा इसलिए हो रहा है क्योकि साल दर साल बढ़ रहे प्रदूषण के कारण बारिश मे मिलने वाली गैसो की मात्रा मे लगातार वृद्धि हो रही है। एक अध्ययन के अनुसार 1981 से 2012 के बीच बारिश के पीएच वैल्यू मे लगातार गिरावट आ रही है।

ऐसी ही बारिश के कारण ही धरती की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है। इसके कारण ही फसलों की पैदावार प्रभावित हो रही है।ऐसे बारिश के कारण सात अजूबे मे से एक ताज महल का रंग भी उड़ता जा रहा है। ताज महल जैसी एतिहासिक इमारते भी बदरंग हो रही है। एसिड रेन से पत्थरो और मिट्टी मे मौजूद भारी धातुओ के साल्ट भी जल के स्रोतो मे मिल रहे है। ये धातु खेतो से होकर इन्सानो के शरीर मे पहुँच रहा है। इनकी वजह से ब्रोकाइटिस और अस्थमा जैसी बीमारियां होने का खतरा होता है। धरती पर जानलेवा प्रदूषण के लिए संसाधनो का तेज़ी से इस्तेमाल होना ही जिम्मेदार है, जिसके लिए हम खुद भी उतने ही दोषी है।

 

 

उज्जवल कुमार सिन्हा

न्यूज़नेट इनटर्न

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