सेफ्टी के लिए ट्रैफिक सेवा बेहतर होना ज़रूरी

सेफ्टी के लिए ट्रैफिक सेवा बेहतर होना ज़रूरी

पटना की सड़कों पर लहरिया कट बाइक चलाने वालों पर पीके दास ने बड़ी कार्रवाई की। हजारों की संख्या में बिना हेलमेट बाइक चलाने वालों का चालान काटा। सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी फैलाई। पीके दास फिलहाल बीएमपी में कमांडेंट हैं, मगर उनकी बड़ी पहचान पटना के पूर्व ट्रैफिक एसपी के रूप में है। बतौर ट्रैफिक एसपी उन्होंने सुरक्षित व सुगम यातायात के कई उपाय किए।

पीके दास कहते हैं, पुलिस का काम सिर्फ क्राइम कंट्रोल नहीं बल्कि हर तरह की सुरक्षा मुहैया कराना है। ट्रैफिक का भी इसमें अहम रोल है। भारत में सड़क हादसे एक बड़ी समस्या है। ट्रैफिक एसपी रहते हुए मैंने सड़क सुरक्षा को मिशन के तौर पर लिया। पटना का ट्रैफिक सिस्टम भी दुरुस्त किया। चौराहों और ट्रैफिक पोस्ट पर कैमरे से भी निगरानी शुरू हुई।

वे कहते हैं कि मॉर्डन एप्रोच अपनाकर पुलिसिंग और ट्रैफिक व्यवस्था दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है। घटना छोटी या हो बड़ी, हादसे के बाद सिर्फ केस दर्ज करने या दोषी ड्राइवर को सजा देने से समाधान नहीं होगा बल्कि दुर्घटना के पीछे की वजह जानना जरूरी है। इसके लिए परिवहन विभाग, नगर निगम से लेकर थाना पुलिस को संयुक्त रूप से जुट कर काम करना होगा।

पटना में अगर बेली रोड और अशोक राजपथ पर स्पीड डिटेक्शन की व्यवस्था नहीं है, तो हाइवे पर गाडिय़ों की स्पीड कंट्रोल कैसे की जा सकती है। ऐसे में बेली रोड सहित शहर से जुड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर हाई स्पीड कंट्रोल के लिए उपकरण लगाने की जरूरत है। घटना छोटी हो या बड़ी, मामला एक दूसरे पर फेंकने के बजाय आपसी समन्वय बनाएं। परिवहन, सड़क निर्माण विभाग, ट्रैफिक पुलिस, थाना पुलिस से लेकर एक्सपर्ट तक इसके लिए को-ऑर्डिनेट करें।

ट्रैफिक कंट्रोल रूम में बैठकर नहीं बल्कि जाम या दुर्घटना वाले स्थानों पर पहुंचकर रिसर्च करना जरूरी है। एक पैनल बनना चाहिए, जो सीनियर लेवल का होना चाहिए। इसमें ट्रांसपोर्ट, रोड, ट्रैफिक, सीनियर अफसर के साथ ही थाना स्तर पर हर दुर्घटना का डाटा उपलब्ध होना चाहिए। इसके साथ ही डाकबंगला, बोर्डिंग रोड, बेली रोड, हड़ताली मोड़ सहित प्रमुख चौराहों पर जेब्रा क्रासिंग के साथ ही ऑटामैटिक रेड सिग्नल सिस्टम होना चाहिए।

 

उज्जवल कुमार सिन्हा

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