होली के कई रंग

होली के कई रंग

खट्टे मीठे दहीवड़े, मावे से भरे पुए, चाट पकोड़े और मुह मे पानी लाने वाले ढेर सारे पकवान जो सब मज़े से होली पर चटकाते है पर कभी सोचा, इन्हे बनाने वालो की क्या हालत होती है। सुबह माँ के साथ किच्चन मे जाओ तो सीधे शाम को बाहर आओ । ये बनाओ वो बनाओ घर की साफ-सफाई करो, चद्दर पर्दे बदलो, घर के इस कोने से दूसरे कोने तक भागा दौडी मची रहती है काम की भरमार लगी होती और काम कर कर के मम्मी परेशान हो जाती है। ऐसी होती है हम लड़कियो की होली।

लेकिन हमारे भाई, वो क्या करते है बाहर जाते है, कपड़ा फाड़ होली खेलते है घर आते है और बैठ के बस खाते है उन्हे न घर की सफाई करनी होती है न कुछ बनाने की चिंता बस घूमो खाओ और होली खेलो लेकिन अगर वो खाना बनयेंगे तो रसोई का क्या हाल होगा सोच कर ही डर लगता है और सफाई तो ऐसी करेंगे की सच में घर साफ हो जाएगा।

हम लड़कियो की होली तो रसोई मे ही बितती है। मेरे कॉलोनी मे हर बार दही हांडी फोड़ी जाती है पर किच्चन मे इतना काम होता है की फुर्सत ही नही मिलती की देख सके। वो अलग बात है की झटपट छत पर जा कर देख ही आते है ।

शाम मे जब सारे दोस्त मिल कर बाते कर रहे थे तब मेरी सहेली सीमा ने कहा की उनके पैरो मे अभी तक दर्द है दिन भर किच्चन मे काम करते करते इतना थक गयी है की कम से कम तीन चार दिन आराम करेंगी तब जाके ठीक होंगी लेकिन ये भी कहा की शाम मे गुलाल खेलने में जो मज़ा है वो सारी थकान दूर कर देती है।  पुजा तो साफ सफाई करते करते इतनी थक गयी है की छुट्टी खत्म होने के बाद भी कॉलेज नहीं गयी पर होली पर जम कर सारे पकवान खाये।

पहले साफ सफाई करो और खाने पीने की तैयारी मेहमानो के आने पर उनकी मेज़बानी करो और फिर मेहमानो के जाने के बाद फिर से साफ सफाई करो।  कितना काम होता है।

लेकिन जो भी हो होली तो होली होती है और उसक मज़ा भी सबके साथ ही आता है फिर चाहे भाई कितने भी आलसी हो। शाम मे बुरा ना मानो होली है चिल्ला कर गुलाल लगाने में जो मज़ा है वो कुछ और ही है और आपसी नोक झोक मे एक अपना ही मज़ा है जिसमे प्रेम की झलक होली के इस पावन त्यौहार मे दिखती है ।