बिहार में वुशू खिलाड़ियों ने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया।

दिनांक 26 से 28 जुलाई 2019 तक इंडोर खेल परिसर सिकंदरपुर, मुजफ्फरपुर में 9वीं बार बिहार राज्य सब जूनियर/जूनियर सीनियर वुशू प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता में पटना में स्थित वुशू संघ की ओर से 33 सदस्यीय दल ने भाग लिया। जिसमें से 13 स्वर्ण, 03 रजत तथा 12 कास्य पदक के साथ पटना के वुशू खिलाड़ियों ने बहुत ही अच्छा प्रदर्शन किया। इस प्रतियोगिता में न सिर्फ लड़कों ने बल्कि लड़कियों ने भी बढ़ – चढ़कर हिस्सा लिया। जहाँ लड़कों ने 14 मेडल प्राप्त किया वहीं लड़कियों ने भी 14 मेडल प्राप्त किया।

स्वर्ण पदक पाने वालों के प्रतियोगियों मे वंशिका राजे, शैलजा सिंह, सृष्टि सिंह, शगुन सिंह, शांभवी, अथर्व मिश्रा, अंशु कुमारी, निशा राज, आयुषी स्तुति, यशस्वी राज, शिबू अनुराज, शुभम कुमार, अमनदीप शामिल थे।

वही रजत पदक पाने वालों में आन्वी कुमारी, आर्यन राज और शिवानी कुमारी थी तथा कांस्य पदक पाने वालों के में राजनंदिनी, खुशी अनुराग, विराट कुंज, आदित्य राज, तेजस्व राज, मनोज कुमार, आयुष सिंह, प्रेम कुमार, सूरज कुमार, चन्दन कुमार, अंजलि कुमारी, राहुल सिंह शामिल थे।

पटना के वुशू खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में ओवर ऑल चैम्पियन में तीसरा स्थान प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता में पटना की महिला खिलाड़ियों ने भी अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन किया। सभी खिलाड़ियों को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए कोच एवं महासचिव सूरज कुमार, दल प्रभारी – प्रीति कुमारी, विकास रंजन एवं संघ के अध्यक्ष डॉ अमूल्य कुमार सिंह, उपाध्यक्ष – डॉ बी. प्रियम, एवं सभी खेल संघों के पदाधिकारियों ने बधाई दी।      

इनमें से कांस्य पदक विजेता राहुल सिंह का कहना था कि वह पटना वुशू संघ में वुशू डेढ़ साल से सीख रहे है और वह अभी कुछ विध्यार्थियों को मार्शल आर्ट्स तथा सेल्फ – डिफेंस का प्रशिक्षण भी दे रहा है।

वुशू संघ की स्थापना बिहार में 1994 में श्री दीनेश कुमार मिश्रा द्वारा किया गया था तथा पटना में वुशू संघ की स्थापना सूरज कुमार द्वारा किया गया जो की पटना वुशू संघ के कोच और महासचिव है। यहाँ खिलाड़ियों को वुशू, जुड़ो, कराटे, कुंग – फू, किक बॉक्सिंग, बॉक्सिंग, विंग – चूँ आदि की शिक्षा तथा अभ्यास कराया जाता है।

वुशू संघ का उद्देश्य बिहार राज्य के विशेष रूप से वुशू के खेल के विकास को प्रोत्साहित करना, सहायता तथा बढ़ावा देना है।

प्रीति दयाल