पटना की सड़कों पर दौड़ती है “ई-रिक्शा” की रफ्तार।

पटना की सड़कों पर दौड़ती है “ई-रिक्शा” की रफ्तार।

आजकल प्रदूषण की समस्या हर जगह है, ऑटो, बस या बड़ी गाड़ियां उनसे निकलते धुएँ स्वास्थ के लिए हानिकारक हो जाते है, जिस वजह से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इन्ही सब समस्याओं को कम करने के लिए कई अन्य शहरों के जैसे बिहार में भी लाया गया है ई-रिक्शा जो की बैटरी से चलती है। इसमें ना तो धुआँ निकलने की समस्या है और ना ही ऑटो जैसी आवाज निकलने की। देखा जाए तो हर इलाके में ई-रिक्शा चलते दिखते है जैसे राजापुल से बोरिंग रोड चौराहा, हड़ताली मोड़ से आर-ब्लॉक, गांधी मैदान से स्टेशन आदि।

बात करें पटना शहर की तो अब हर जगह ई-रिक्शा ही नज़र पड़ते है साथ ही पटनावासियो द्वारा इसे खासा पसंद भी किया जा रहा है अब वो लोग ऑटो के बजाए ई-रिक्शा लेना पसंद करते है, लोगों का  मानना है की इसमें बैठ कर उन्हें बहुत आराम मिलता है और इसमें परेशानी भी नहीं होती है, और ज्यादा खर्च भी नहीं होता है। ऑटो या बसो के विषय में लोगो का कहना है की इसमें यात्रियों को बहुत ही दिक्कत से बैठना पड़ता है जब चार से ज्यादा लोगों को बैठाया जाता है और बस की बात करें तो ऐसे बैठा दिया जाता है की सांस लेने तक की जगह नही रहती है। कभी कभी तो इतनी तेज़ चलाते है की एक्सिडेंट होने की आशंका बढ़ जाती है।

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वहीं बोरिंग रोड की आस्था कश्यप का कहना है “ई-रिक्शा” आ जाने से प्रदूषण में कमी तो आई है साथ ही उन्हें इस से सफर करने में अच्छा लगता है और ये भी कहा जब वो अगर वक़्त से पहले अगर काम के लिए निकलती है तो ई-रिक्शा लेती है क्योंकि वो बहुत आराम से चलता है और यदि वो काम के लिए लेट हो रही होती है तो ऑटो लेती है क्योंकि उसकी रफ्तार थोड़ी तेज़ होती है पर इसके बावजूद भी उन्हे ई-रिक्शा ज्यादा पसंद है, इसमें सिर्फ चार ही यात्री बैठ सकते वो भी आराम से।

वहीं रोशन जो की ई-रिक्शा चालक है उनका कहना है की वो कुछ एक महीने पहले से ई-रिक्शा चला रहे इससे पहले वो सिर्फ रिक्शा चलाते थे। उन्होने बताया है ई-रिक्शा चलाते हुए उनकी दिनभर की कमाई 100-150 रुपये होती है, दिनभर में ज़्यादातर लोग ई-रिक्शा ही लेते है। जी से उनकी दिनभर की कमाई चलती है।   

अतः ई-रिक्शा का पटना की सड़कों पर चलना एक अच्छी चीज है। प्रदूषण भी कम और परेशानी भी कम।    

शाम्भवी

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