भारत पर रिलायंस के एकाधिकार का ख़तरा

भारत पर रिलायंस के एकाधिकार का ख़तरा

भारत के सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ अब ई-कॉमर्स के क्षेत्र में उतर रही है। इस क्षेत्र में उतरने के बाद वो अमेज़न और फ़्लिपकार्ट जैसी कंपनियों को टक्कर देगी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज़ फ़िलहाल ग्रोसरी डिलिवरी सेवा के लिए लोगों को जुड़ने का निमंत्रण दे रही है। ये सेवा रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की दो सहयोगी कंपनियां रिलायंस रिटेल और रिलायंस जियो मिलकर चलाएंगी और इसको जियोमार्ट का नाम दिया गया है।

जियोमार्ट के मुताबिक उसके यहाँ अभी ऐसे लगभग 50,000 सामान हैं जिसे वो अपने ग्राहकों को ‘मुफ़्त और एक्सप्रेस’ डिलीवर करेगी।

इसके लिए रिलायंस ने अलग व्यवस्था की है वह ग्राहकों को एक ऐप के ज़रिए लोकल स्टोर्स से जोड़ेगी और सामानों को वो स्टोर ग्राहकों तक पहुंचा देंगे।

रिलायंस का ई-कॉमर्स में आने से बड़ा असर पड़ेगा क्योंकि रिटेल इंडस्ट्री में इस समय यह कंपनी बड़ी कंपनियों में से एक है।

रिलायंस की उपस्थिति मार्केट में अलग-अलग रूप में है। रिलायंस डिजिटल, रिलायंस ट्रेंड्स और रिलायंस जूल्स अलग-अलग स्टोर्स हैं जो बंटे हुए हैं और काम कर रहे हैं।

रिलायंस की काफ़ी समय से कोशिश थी कि वो रिटेल में अपनी एक बड़ी उपस्थिति दिखाए।

मुकेश अंबानी ने ई-कॉमर्स में आने की घोषणा तो कर दी है लेकिन वहीं एक बड़ी घटना और हुई है।

फ़्यूचर ग्रुप ने अमेज़न के साथ साझीदारी की है। यह ख़बर है कि गणतंत्र दिवस पर फ़्यूचर ग्रुप जो अपनी सेल लगाता था वो इस बार अमेज़न पर लगेगी।

जिस तरह टेलीकॉम में रिलायंस का मुक़ाबला एयरटेल और वोडाफ़ोन के साथ था। उसी तरह से रिटेल में अब उनका मुक़ाबला अमेज़न और फ़्लिपकार्ट के साथ है।

ई-कॉमर्स क्षेत्र में रिलायंस के पास इंफ़्रास्ट्रक्चर पहले से मौजूद है। इनके पास टेलीकॉम का बहुत बड़ा नेटवर्क है, रिटेल स्टोर खड़े हैं। साथ ही यह अपने टेलीकॉम उपभोक्ताओं को जल्दी डिलीवरी करने जैसे ऑफ़र दे सकते हैं।

ऐसा नहीं है कि आम दुकानदारों का धंधा चौपट हो जाएगा ये लोग उनके साथ टाइअप करने की योजना बना रहे हैं।

हर बड़े रिटेलर का अरमान होता है कि वो देश के कोने-कोने में मौजूद बनिए के साथ टाइअप कर ले और वो उसके लिए काम करें। वही, मॉडल रिलायंस भी अपनाएगी।

इस वजह से उस दुकानदार को कोई मुश्किल नहीं होगी लेकिन उसके बाद आगे जाकर यह कंपनी दुकानदार को मालिक बनाने के बजाय मैनेजर बनाकर रखेंगे। इसके बाद सवाल खड़े हो जाएंगे कि क्या वो दुकानदार असल में मालिक रहेगा।

यहाँ रिलायंस के एकाधिकार का ख़तरा है। यह कंपनी पेट्रोलियम में तो एकाधिकार स्थापित कर ही चुकी है, अब रिटेल में आ रही है। इससे यह सवाल खड़ा हो जाएगा कि यह सरकार किसके लिए काम कर रही है और क्या एक-दो घरानों को देश का सारा कारोबार सौंप दिया जाएगा।

जो भी धंधा देखिए या तो वो अंबानी परिवार के पास जाएगा या फिर अडानी परिवार के पास। साथ ही रिटेल ई-कॉमर्स में नियम-क़ायदे क्या होंगे यह अभी साफ़ नहीं है। अमेज़न-फ़्लिपकार्ट कितना टिक पाएंगे नहीं मालूम है।

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