एसिड अटैक का शिकार हुआ 16 वर्षीय लड़का, मीडिया ने साधी चुप्पी ?

एसिड अटैक का शिकार हुआ 16 वर्षीय लड़का, मीडिया ने साधी चुप्पी ?

गया के ग्रामीण इलाके का 16 वर्षीय लड़का नीतीश कुमार फिलहाल अपोलो अस्पताल में भर्ती है। उसके शरीर का 55% हिस्सा पूरे तरीके से जल चुका है। गले के नीचे के आधे से अधिक हिस्से की चमड़ी निकल चुकी है। 

    क्या है मामला

    घटना करीब एक महीने पहले की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तथा अन्य विदेशी वेबसाइटों द्वारा कुछ तस्वीरें सार्वजनिक होने के कारण यह मामला उठा है। यह दुर्घटना किसी भी स्थानीय प्रेस तथा एनजीओ, जो एसिड अटैक जैसे मामलों में आवाज उठाते हैं, उन्होंने इस घटना पर अपना मुंह नहीं खोला।

    11 अगस्त के दिन अपने दिनचर्या के अनुसार नीतीश सुबह ताज़ी सब्जियां लेकर घर जा रहा था तभी अज्ञात मोटरसाइकिल सवार 3 व्यक्तियों ने उसके शरीर पर एसिड फेका। गया ज़िले के कामता नगर गांव के निकट घर से करीब 750 मीटर दूर इस वारदात को अंजाम दिया गया।

    न्यूजनेट वन के रिपोर्टर अभय कुमार ने नीतीश से बातचीत करने की कोशिश की। नीतीश को लगा किसी ने चालाकी से उसपर पानी फेका है, मगर थोड़ी ही देर बाद उसका शरीर जलने लगा। नीतीश थैला वहीं छोड़ चिल्लाते हुए घर की ओर भागा। वह इतनी पीड़ा में था की मोटरसाइकिल का नंबर प्लेट  भी न देख पाया।

    नीतीश का ट्रीटमेंट करने वाली सुषमा शर्मा ने कहा,“ तेज़ाब के कारण शरीर का 55% हिस्सा पूरे तरीके से जल चुका है। हालांकि चेहरा बच गया।

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    अनीसाबाद के अभिनाश लाल का कहना है,“नीतीश के पीठ पर गले से लेकर घुटने तक तथा आगे छाती से लेकर घुटने तक का हिस्सा तथा दोनो हाथ पूरे तरीके से जल चुके हैं।

    नीतीश की मां एवं उसके दो भाई दिन रात अस्पताल में उसकी देखभाल करते हैं जबकि  उसके पिता ठेला चलाकर परिवार का गुजारा कर रहे है। गांव के लोगों ने नीतीश को घर से 90 कि मी दूर पटना लाने में मदद की।

स्थिति अभी भी गंभीर

    अपोलो अस्पताल के बर्न यूनिट के डॉक्टर के. एन. तिवारी ने कहा, “शुरुआत में स्थिति काफी गंभीर थी पर अब इलाज के बाद हालात बेहतर है। जब नीतीश को अस्पताल लाया गया तब डॉक्टर तिवारी अचंभित थे की इतने अधिक हिस्से के जलने के बावजूद नीतीश जिंदा था।

    डॉक्टर तिवारी ने कहा, “ज़ख्म इतने गहरे हैं कि वह खुद से ठीक नहीं हो सकते। स्किन ग्राफ्टिंग यानी त्वचा निरोपण ही एक मात्र इलाज है मगर जलने के बाद शरीर में कम चमड़ी बचने के कारण शरीर के पूरे हिस्से का इलाज नहीं किया जा सकता।”

    नीतीश के शरीर में हीमोग्लोबिन की मात्रा भी काफी कम है जिस वजह त्वचा निरोपण करना खतरनाक हो सकता है। नर्स ने कहा, “हर दिन ड्रेसिंग के वक्त भी शरीर से काफी मात्रा में खून निकल रहा है।

    नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले नीतीश के छोटे भाई संजीत का कहना है की नीतीश को हर तीसरे दिन खून चढ़ाया जाता है। परेशानी की बात यह है की सर्जरी किस प्रकार की जाए क्योंकि इलाज के लिए उसके शरीर में चमड़ी बची ही नही है। 

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    इस वारदात के पीछे का कारण जानना अभी बाकी है। ईसाई समुदाय के लोगों को शक है की यह काम गांव के ईसाई –विरोधी लोगों का है।

    संजीत का कहना है की करीब दो साल पहले नीतीश, उसके चार भाई, दो बहनें, मां तथा पिता हिंदू थे। उसके बाद से वे लोग ईसाई समुदाय में सम्मिलित हो गए।

    संजीत ने यह भी बताया की कुछ लोगों ने यह बात गांव में फैला दी थी की ईसाई धर्म अपनाया तो उसे गांव से निष्कासित कर दिया जाएगा। उसने कहा,“हमने भी यह बात सुनी थी पर हम अपने विश्वास पर अड़े रहे,तभी यह घटना हो गई। 

    पिछले साल दिसंबर में कुछ ईसाई विरोधी लोगों ने कुरवा में रविवार की प्रार्थना सभा में जाने वाले लोगों का रास्ता रोक कर उनसे पूछताछ की थी। संजीत ने आगे कहा ,“वह लोग प्रार्थना सभा में जाने कारण पूछा करते थे। उनलोगो ने यह भी पूछा की क्या प्रार्थना में सम्मिलित होने के लिए लोग पैसे तथा अन्य प्रलोभन देते थे, या फिर जबरदस्ती उन्हें सभा में शामिल किया जाता था?” हमलोगो ने कहा हमलोग अपनी मर्जी से गिरजाघर जाते हैं।

    धर्मांतरण के बाद कुमार परिवार ईसाई विरोधियों के नजर में आ गए। वे लोग हर शाम को अन्य 20 लोगों के साथ अपने घर में प्रार्थना सभा रखते थे तथा नीतीश एवं संजीत प्रार्थना सभा के संचालन हेतु अन्य स्थानों पर भी जाते थे।

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    संजीत ने कहा,“हमें मालूम है की जो लोग ईसा मसीह में विश्वास करते हैं उन्हें पीड़ा सहकर तथा संकरे रास्ते से ईश्वर के राज्य में प्रवेश करना होता है।

    इस दुर्घटना के बाद नीतीश कुमार का परिवार रिपोर्ट दर्ज कराने के पक्ष में नहीं है। भारतीय दंड संहिता द्वारा यह केस धारा 322, 325  तथा 326 के अंतर्गत दर्ज कर लिया गया है। 

    हमारे पत्रकार अभय कुमार का कहना है की इस बड़े हादसे के बाद परिवार अभी भी डर में जी रहा है। परिवार के सदस्य पुलिस को रिपोर्ट दर्ज नहीं करना चाहते हैं। इस बात से यह साबित होता है की आज के युग में भी बिहार, जहां सु–शासन की बात होती है वहां लोग अभी भी ताकतवर समाज विरोधी लोगों के कारण दबकर जीने पर मजबूर हैं।

[Prepared by Seema Kisku]

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