सावन : मांसाहारियो के लिए तपस्या का महिना

 सावन, हरियाली और खुशहाली का मौसम माना जाता है । लेकिन यहीं मैासम मांसाहारियो के लिए सबसे कठिन भी है ।हमारे बिहारी परंपराओं के अनुसार, सावन का पुरा महिना धार्मिक यात्राओ को समरपित है और अधिकांश लोग  व्रत करते है,  इसी वजह से मांस को हाथ भी नही लगाते । मांस -मछली के दुकानदार रातो-रात इस महीने मे अपना व्यवसाय बदल कर दुसरे कामों में लग जाते हैं । नियमित मांसाहारी या तो पारंपरिक कारणों से या तो पारिवारिक कारणों से, मांसाहार नहीं खाते हैं।अन्य महिनो में, खासकर शादी के दिनो में, मांसाहार भोजन का प्रचलन काफी बढ़ गया है । हर खुशी, हर शुभारंभ की शुरूआत एक मुर्गी या बकरे की जान लेकर होती है । लेकिन सावन मे इन दिनो सारे मुर्गे मुर्गिया भी अहिंसा दिवस मनाते हैं ।
राजीव नगर के सैरव कहते है  कि  चिकेन रोल और एग रोल के ठेले के पास से गुजरते ही मुँह  मे सुनामी आ है । मैं बाता नहीं सकता कि आज -कल कैसे अपने ऊपर कबू करता हूँ इन चीजों को देख कर । लेकिन सावन खत्म होते ही मैं तो सबसे पहले चिकेन पर टूट पडूंगा  । वहीं अभिजित कहते है कि घर से छुप कर बाहर मे शाम को चिकेन खा लेता हूं ।
इस विषय पर अलग – अलग लोगों की अलग -अलग राय मिली । लेकिन ज्यादातर लोगों ने कहा कि वो धार्मिक कारणों से सावन में मांसाहार का सेवन बंद कर देते हैं ।
 विशेषञो के अनुसार सावन के महिने में मांसाहार का सेवन ना करने के पीछे वैञानिक कारण है । हिंन्दु मास के अनुसार, सावन का महिना मछलियों के प्रजन्न का महिना होता है । हमारी जितनी भी पुरानी सभ्यताएं   थी, सभी का विकास नदियो के किनारे ही हुआ, और मछली उनके मुख्य भोजन में से एक था । उनका मानना था कि अगर वो इस महीने एक भी मछली को खाते हैं, जिसके गर्भ में हजारों अंडे हो, तो वो सिर्फ एक मछली नहीं, बिल्की उन अन्य हजारों को भी नष्ट करते हैं । यह एक मुख्य कारण था कि लोग सावन के महिने में मांसाहार का सेवन वर्जित करते थे ।
कई बार ऐसा पाया गया है कि धार्मिक मान्यताओं का सीधा संबंध वैञानिक कारणों से रहा है । सावन में मांसाहार का वर्जित होना, वर्त – उपवास इसके मुख्य उदाहरण है ।
शिवांशु

2 Responses to "सावन : मांसाहारियो के लिए तपस्या का महिना"

  1. pragati   August 2, 2018 at 9:27 pm

    sahi baat hai
    sawan ka mahina sach me pawitra hota h
    lkn fir v kuch logon ka kehna h ki
    bhagwan ko dil s manna chaie wahi kafi hota h
    islie kch log sawan m v maans machali kha lte h

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  2. Megha   August 2, 2018 at 9:10 pm

    Yaah there are.scientific reason..by the way good artical.even I can’t wait for ending savaan.

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