पटना समेत राज्य के अन्य शहरों में हवा की गुणवत्ता की होगी जांच

पटना समेत राज्य के अन्य शहरों में हवा की गुणवत्ता की होगी जांच

मंगलवार 27 अगस्त को शहर के अरण्य भवन में आयोजित एक बैठक में उपमुख्य मंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा कि निर्माण सामग्री परिवहन एव सड़क , पुल तथा भवनों का निर्माण कार्य ढककर किया जाए। ऐसा ना करने पर जो भी ठेकेदार दोषी पाए जायेंगे, उन पर कार्रवाई की जाएगी।

यह बैठक सड़क, पुल व भवनों के निर्माण कार्य में उत्पन वायु प्रदूषण के रोकथाम को लेकर बुलायी गयी थी। उपमुख्य मंत्री ने कहा कि धूलकण पर रोक के लिए पथ निर्माण विभाग को सडकों के किनारे पक्का फ्लैक बनाने के दिशा – निर्देश दिए गए है। हवा की गुणवत्ता की जांच के लिए जल्द ही राजधानी पटना सहित राज्य के 42 ज़िलों में एयर मॉनिटरिंग सिस्ट मकेंद्र खोले जायेंगे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार साल 2010 से 2016 के बीच विश्व में सबसे ज्यादा प्रदूषित 20 शहरों में से 13 भारत के थे। इन 13 शहरों में राज्य के पटना, गया और मुज़्ज़फरपुर ज़िले शामिल है। ठंड में आद्रता की वजह से वायु मंडल में पीएम 2.5 के धूलकण की मात्रा बढ़जाने से वायु प्रदुषण की स्थिति और भयावह होती जा रही है। राजधानी पटना में तारामंडल,  आई जी आई एम एस, ईकोपार्क, बापू सभागार तथा ऍनआईटी में हवा की गुणवत्ता मापनेवाले केंद्र इस साल अक्टूबर के महीने से काम करने लगेंगे।

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इन सब के अतरिक्त भागलपुर ,दरभंगा तथा हाजीपुर में भी केंद्र की स्थापना की जा रही है। गया में कार्यरत एक केंद्र के अलावा दूसरा भी केंद्र नवंबर से काम करने लगेगा।  5 साल की देख-भाल के साथ एक करोड़ 70 लाख की लागत से केंद्र स्थापित करने का टेंडर दिया जा चूका है। राज्य के 42 अन्य शहरों में भी इस तरह केंद्रस्थापित कर हवा की गुणवत्ता पर नज़र रखी जाएगी।